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गैलीलियो को चुप कराया गया — क्योंकि वो सच बोल रहा था

जब सत्ता को सच से खतरा हो जाए, तो सच बोलने वाले को ही खतरा बना दिया जाता है। 1633 का साल था। एक 69 साल का बूढ़ा आदमी — बीमार, थका हुआ, आँखें कमज़ोर — रोम की एक अदालत में घुटनों के बल बैठा था। उसके सामने बैठे थे चर्च के सबसे ताकतवर लोग। Inquisition। वो लोग जो तय करते थे कि कौन सा सच "सच" है और कौन सा "पाप"। उस बूढ़े का नाम था — Galileo Galilei । उससे कहा गया — "माफ़ी माँगो। कहो कि तुम गलत थे।" और Galileo ने माफ़ी माँग ली। लेकिन कहते हैं कि जैसे ही वो उठा, उसने धीरे से कहा — " और फिर भी, पृथ्वी घूमती है। " Eppur si muove . झूठ की नींव पर खड़ी थी एक पूरी सत्ता समझना ज़रूरी है कि Galileo से पहले दुनिया क्या मानती थी। Ptolemy का model — जो हज़ारों साल से चला आ रहा था — कहता था कि पृथ्वी ब्रह्मांड का केंद्र है। सूरज, चाँद, तारे — सब पृथ्वी के चारों तरफ घूमते हैं। और चर्च ने इस theory को Bible से जोड़ दिया था। क्यों? क्योंकि अगर पृथ्वी केंद्र है — तो इंसान केंद्र है। और अगर इंसान केंद्र है — तो भगवान का घर यहीं है। और अगर भगवान का घर यहीं है — तो चर्च ...