भूमिका – अंधेरे में अचानक उजाला… कभी ऐसा हुआ है तुम्हारे साथ… तुम शांत बैठकर आँखें बंद करते हो — बस कुछ पल के लिए खुद से मिलने के लिए… और तभी… उस गहरे अंधेरे के बीच एक हल्की सी चमक दिखती है। पहले तो लगता है जैसे कोई भ्रम है… फिर वो रोशनी थोड़ी और साफ होती है — कभी गोल, कभी चमकीली, कभी हल्की नीली या सफेद। उस पल दिल में एक अजीब सा सवा…
Read more »भूमिका – अचानक किसी की याद क्यों आती है? कभी आपके साथ ऐसा हुआ है कि आप अचानक किसी व्यक्ति के बारे में सोचने लगते हैं — बिना किसी कारण के। मन में उसका चेहरा उभर आता है, उसकी आवाज़ याद आने लगती है। और कुछ ही देर बाद उसी व्यक्ति का फोन आ जाता है या उसका संदेश आ जाता है। ऐसे क्षणों में अक्सर मन में एक सवाल उठता है — क्या यह सिर्फ संयोग …
Read more »रंगों के मनोविज्ञान और आध्यात्मिक प्रभाव का गुप्त रहस्य भूमिका – अलमारी के सामने खड़ा वह मौन क्षण सुबह जब आप अलमारी खोलते हैं, तो क्या सच में सिर्फ कपड़े चुनते हैं? या अनजाने में अपनी आज की ऊर्जा भी तय कर लेते हैं? ध्यान से देखिए… कुछ दिन आप सफेद पहनते हैं और भीतर एक अजीब सी शांति महसूस होती है। कभी लाल पहनते ही आत्मविश्वास बढ़ जाता…
Read more »1. भूमिका – क्या रंग सिर्फ बाहर लगते हैं या भीतर भी? जब होली आती है, तो हम एक-दूसरे को रंग लगाते हैं, हँसते हैं, गले मिलते हैं। पर कभी तुमने सोचा है — ये रंग सिर्फ त्वचा पर लगते हैं या हमारी ऊर्जा पर भी? क्यों होली के बाद कई लोग हल्का, खुला और भावनात्मक रूप से मुक्त महसूस करते हैं? क्या ये सिर्फ त्योहार की खुशी है… या सच में रं…
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