1. भूमिका – एक ऐसा शब्द जो पूरी नियति बदल देता है कभी-कभी ज़िंदगी में हम ऐसे मोड़ पर खड़े होते हैं जहां न दिमाग चलता है, न रास्ते दिखते हैं, और न ही किसी इंसान की आवाज़ सुनाई देती है। लेकिन तभी भीतर से एक छोटी-सी रोशनी उठती है—और लगता है कि शायद कोई “ऊपर वाला” भी है, जो हमारे लिए कुछ कर सकता है। इसी एहसास का नाम है — “कुन फ़ाया”। एक…
Read more »1. भूमिका — जब मन थक जाता है चाहतों से कभी ध्यान दिया है आपने… मन तब नहीं टूटता जब जीवन कठिन हो जाता है— वह तब टूटता है जब मन की अधूरी इच्छाएँ ( over desire principle ) हमारी साँसों का बोझ बढ़ा देती हैं। हम पैसा, प्यार, सफलता जैसी चीज़ें नहीं चाहते— हम चाहते हैं कि यह सब हमें अंदर से पूरा कर दे। और जब यह नहीं होता, मन “Demand Mode” …
Read more »1. भूमिका – जब ‘गोरखधंधा’ शब्द सुनते ही मन झिझक जाता है क्या आपने कभी गौर किया है कि कुछ शब्द सुनते ही दिमाग अचानक एक छवि बना लेता है? जैसे ही कोई व्यक्ति कह दे — “ अरे ये तो बड़ा गोरखधंधा है! ” तो मन में तुरंत कुछ उलझा हुआ, रहस्यमय, अजीब-सा दृश्य उभर आता है। पर क्या कभी सोचा कि इस शब्द का असली सच क्या है? क्या गोरखनाथ जैसे महान योग…
Read more »1. भूमिका – हर सवाल का जवाब ज़रूरी नहीं होता, लेकिन हर मौन बहुत कुछ कहता है क्या तुमने कभी गौर किया है? हम मनुष्य प्रश्नों के इतने भूखे हैं कि कभी-कभी जीवन के असली अनुभव को ही खो देते हैं। कुछ सवाल ऐसे होते हैं जो हमें ज्ञान की ओर नहीं ले जाते, बल्कि उलझन की ओर धकेल देते हैं— और बुद्ध यही बात बहुत गहराई से समझते थे। उनके पास लोग आते…
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